दुनिया का कोई भी मजहब किसी से लडऩा नहीं सिखात

दुनिया का कोई भी मजहब किसी से लडऩा नहीं सिखात

हीरावती शहडोल। हिन्दू समझता है मुसलमान बुरा है और मुसलमान समझता है हिन्दू बुरा लेकिन सच तो यह है कि दुनिया का कोई भी मजहब किसी से लडऩा नहीं सिखाता, उक्त बात खैरहा गांव में चल रहे नौ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दौरान वृदांवन से पधारी बाल विदुषी शीघ्रता त्रिपाठी ने श्रोताओं को कथा का श्रवण कराते हुए कहा। उन्होंने आगे कहा कि हर मजहब से सिर्फ इंसानियत और भाईचारे की सीख मिलती है। भारत के इतिहास में इसका सबसे बड़ा उदाहरण कृष्ण भक्त रसखान है। मजहब के नाम पर अवसरवादियों ने बीते कई सालों से लगातार लोगों को आपस में भड़काने का काम किया है। भक्त रसखान अन्य धर्म के होते हुए भी गोस्वामी बिट्टलनाथ से दीक्षा ग्राहण करने के बाद वृदांवन में रहने लगे और पूरा जीवन कृष्ण भक्ति में गुजार दिया।

कष्टों से मिलते हैं भगवान

उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन केवल सात दिनों का है, जब तक आंखे खुली हैं तो सब साथ देते हैं और बंद हो जाने के बाद कोई साथ नहीं होता। भगवान केवल भाव के भूखें हैं, इसका उदाहरण विदुरानी द्वारा भगवान को केले का छिलका खिलाया गया था, जिसको प्रभु ने पुरे भाव के साथ ग्रहण किया। संसार में मनुष्य न तो किसी को सुख देता है और न ही किसी को दुख, सुख-दुख तो व्यक्ति अपने करमों से भोगता है। सच्चे मन से यदि ईश्वर को याद किया जाये तो वह कभी भी किसी भी स्थान पर भगत के लिये प्रकट हो सकते हैं। भक्त ध्रुव ने मात्र पांच वर्ष की आयु में सच्ची श्रद्धा के साथ भगवान को आवाज दी थी, जिसके बाद भक्त के कष्ट को हरते हुए साक्षात दर्शन दिया था। प्रभु भक्ति में धु्रव ने काफी तकलीफ सहे लेकिन प्रभु भक्ति से दूर भागने का सोचा तक नहीं। मन में भाव होना आवश्यक है, क्योंकि भगवान भाव के भूखे हैं।

पहुंच रहे श्रद्धालु

इस दौरान कथा वाचक पूज्या शीघ्रता त्रिपाठी के पिता आचार्य श्रीकांत त्रिपाठी द्वारा भी समय-समय पर भक्तों को कथा का श्रवण कराया जा रहा है। कथा के दौरान भगवान शिव-पार्वती की सुंदर झांकी सजाई गई थी, जिसको लेकर श्रोता काफी उत्साहित दिखे। बीते 6 अप्रैल से कलश यात्रा के साथ प्रारंभ हुई भागवत कथा को लेकर भक्तों में काफी उत्साह है। आसपास के दर्जनों गांव से श्रोताओं की लगातार संख्या बढ़ रही है। कथा स्थल में आसपास के क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु रोजाना पहुंच कर कथा श्रवण का लाभ ले रहे हैं।