हवा के साथ या खिलाफ? जिस भी नजरिये से देखना चाहे लेकिन देखने लायक है “मुल्क “

फिल्म रिव्यू
अनुभव सिन्हा ने फिल्म को बेहतरीन डायरेक्ट किया है। ऋषि कपूर मुस्लिम के किरदार में जबदस्त दिखे हैं। अब तक तापसी को हम सभी ने किसी ग्लैमरस (जुड़वा 2), रॉव एजेंट (नाम शबा ना) या फिर घर में रहने वाली एक इंडिपेंडेंट लड़की (पिंक) के किरदार में देखा है। इस फिल्म में वह घर की बहू के साथ वकील की भूमिका में भी नजर आती हैं। तापसी ने अपने वकील वाले किरदार को काफी खूबसूरती से निभाया है। शुरू में बेहद स्लो शुरुआत कर तापसी अचानक से फार्म में आई, जोकि बेहतरीन है। आशुतोष राणा कोर्ट रूम में तापसी पन्नू पर जरूर भारी पड़े।
‘मेरे मुल्क के लिए मेरा प्यार साबित करो’ और ‘मेरे घर में मेरा स्वागत करने का हक उन्हें किसने दिया’, फिल्म के ऐसे जबरदस्त डायलॉग भी दर्शकों के दिलों को जीतने में कामयाब होंगे। हिंदु-मुस्लिम,देशद्रोह और जिहाद जैसे भारी शब्द भी सुनने को मिलते हैं। चूंकि फिल्म हिंदु-मुस्लिम जैसे गंभीर विषय पर आधारित है तो इसलिए फिल्म शुरुआत से लेकर अंत तक आपको सेक्युलरिजम का पाठ भी पढ़ाती है। आखिरी में जज के तौर पर नजर आते एक्टर कुमुद मिश्रा भी जिहाद और आतंकवाद के परिभाषा को बताने में कामयाब रहते हैं।
फिल्म आपको बांधे रखती है और कहीं भी बोर नहीं करती है। अंत में ये फिल्म आपको भावुक कर सकती है। फिल्म में भावुक उतार-चढ़ाव वाले दृश्य भी हैं जिसमें सरताज को उनके पड़ोसी पाकिस्तान और आतंकी ओसामा बिन लादेन का समर्थक बताने लगते हैं। उनके घर पर पत्थर फेंके जाते हैं। निर्देशक अनुभव सिन्हा खुद इंटरव्यू में खुलासा कर चुके हैं कि मुल्क किसी एक घटना पर आधारित नहीं है, इसमें कई घटनाएं शामिल हैं। इनके अंश फिल्म में दिखेंगे।