नासा ने 6 साल बाद फिर सुनीता विलियम्स को अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए चुना, 2019 के परीक्षण में होंगी शामिल

वॉशिंगटन.   नासा ने शुक्रवार को अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले अपने अगले मैन्ड मिशन के नामों का ऐलान कर दिया। इसके लिए भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स समेत 9 एस्ट्रोनॉट्स को चुना गया है। 2012 के बाद नासा का यह पहला मैन्ड मिशन होगा। 2011 में नासा ने इंसानों को अंतरिक्ष में ले जाने वाले स्पेस शटल को रिटायर कर दिया था। इसके बाद से ही एजेंसी मानव अंतरिक्ष यान बनाने के लिए एलन मस्क की स्पेस एक्स और बोइंग के साथ काम कर रही है। दोनों कंपनियां 2019 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर टेस्ट फ्लाइट भेजेंगी।

इंसानों को आईएसएस पर भेजने के लिए नासा ने 2014 में बोइंग और स्पेस-एक्स को 6.8 बिलियन डॉलर (करीब 46 हजार करोड़ रुपए) का कॉन्ट्रैक्ट दिया था। इसके तहत स्पेस एक्स ने अप्रैल 2019 में अपने क्रू-ड्रैगन नाम के यान की टेस्ट फ्लाइट रखी है। दूसरी तरफ बोइंग ने भी अपने सीएसटी-100 स्टारलाइनर नाम के यान की टेस्टिंग अगले साल रखी है। दोनों ही कंपनियां एस्ट्रोनॉट्स के साथ टेस्टिंग के बाद नासा को अपनी रिपोर्ट देंगी, जिससे ये तय किया जा सकेगा कि उनके प्रोजेक्ट इंसानों को अंतरिक्ष में ले जाने के काबिल हैं या नहीं। सुनीता को बोइंग के टेस्ट फ्लाइट प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाया गया है।

 

अनुभवी एस्ट्रोनॉट्स में शुमार हैं सुनीता : अमेरिका के यूक्लिड (ओहियो) में जन्मीं सुनीता विलियम्स नेवी में कैप्टन के पद से रिटायर होने के बाद नासा पहुंची थीं। 1998 में एस्ट्रोनॉट के तौर पर चुने जाने के बाद उन्होंने अब तक करीब 322 दिन आईएसएस पर बिताए हैं। इसके साथ ही उन्होंने करीब 7 बार स्पेस वॉक में भी हिस्सा लिया है। नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जिम ब्राइडेन्स्टाइन ने कहा कि 2011 के बाद से ये पहली बार है जब हम अमेरिका की जमीन से, अमेरिकी रॉकेट पर किसी अमेरिकी एस्ट्रोनॉट को भेजने वाले हैं। वहीं नासा के जाॅनसन स्पेस सेंट के निदेशक मार्क गेयर ने कहा कि हम अपनी पहली फ्लाइट में जिन पुरुषों और महिलाओं को शामिल करते हैं वे हमारे चुनिंदा लोग हैं।