विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार पर फैसला 2019 लोकसभा चुनाव का नतीजा आने के बाद : सूत्र

नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार कौन होगा, इसे लेकर विपक्षी नेताओं के बीच मुलाकातों का दौर जारी है। इस बीच, सूत्रों ने कहा कि विपक्ष से पीएम पद के लिए चेहरा कौन होगा, इसका फैसला 2019 का नतीजा आने के बाद किया जाएगा। इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि अभी प्रधानमंत्री उम्मीदवार का नाम तय किए जाने से क्षेत्रीय दलों की एकता प्रभावित होगी। उधर, कांग्रेस सूत्रों ने कहा था कि पार्टी किसी भी विपक्षी नेता को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार स्वीकर करने को तैयार है, बशर्ते उसे संघ का समर्थन न हो।

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में कूटनीतिक गठबंधन बनाने पर विचार कर रही है। अभी यह तय होना बाकी है कि रायबरेली सीट से यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी चुनाव लड़ेंगी, या फिर उनकी बेटी प्रियंका गांधी।

तृणमूल दूसरा सबसे बड़ा मोदी विरोधी दल : ममता बनर्जी लोकसभा चुनाव से पहले मोदी विरोधी गठबंधन तैयार करने के लिए अलग-अलग पार्टियों के शीर्ष नेताओं से मिल रही हैं। वे राहुल, सोनिया समेत 10 मोदी विरोधी नेताओं से मिल चुकी हैं। इनके अलावा ममता ने बुधवार को लालकृष्ण आडवाणी के पैर छुए। शिवसेना के संजय राउत और भाजपा के शत्रुघ्न सिन्हा से भी मिलीं। विपक्ष की बात करें तो कांग्रेस सबसे बड़ा मोदी विरोधी दल है। उसके पास 48 सीटें हैं। 34 सीटों के साथ तृणमूल दूसरे नंबर पर है। इसके बाद एनडीए से अलग हुई तेलुगु देशम पार्टी के पास 16 और केसीआर की पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति के 11 सांसद हैं।

 

ममता ने खुद को प्रधानमंत्री पद की दौड़ से बाहर बताया : विपक्षी नेताओं से मुलाकात के दौरान ममता ने विपक्ष के संभावित गठबंधन, एनआरसी समेत कई मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने 2019 बीजेपी फिनिश का नारा दिया। हालांकि, ममता ने खुद को प्रधानमंत्री पद की दौड़ से बाहर बताया था।

 

कांग्रेस विपक्ष की रीढ़ बने, राहुल अगुआ रहें : पिछले दिनों नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने कोलकाता में ममता बनर्जी से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने कहा था- 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस को राहुल की अगुआई में विपक्ष की रीढ़ बनना पड़ेगा, ताकि एकता कायम रहे। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसा करने से क्षेत्रीय नेताओं की जिम्मेदारी कम नहीं होती है। वे इस चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे।