मुगल-ए-आजम के 58 साल: शकील बंदायूनी ने 105 बार में लिखा था ‘प्यार किया ताे डरना क्या’, बंटवारे के बाद बंद हो गई थी शूटिंग

बॉलीवुड डेस्क.58 साल पहले दिलीप कुमार, मधुबाला और पृथ्वीराज कपूर की क्लासिक फिल्म 5 अगस्त 1960 को रिलीज हुई थी। उस वक्त मुगल-ए-आजम 1.5 करोड़ में बनकर तैयार हुई थी, जिसे आज के दौर में बनाने में तकरीबन 40 करोड़ से भी ज्यादा की लागत लगती। मुगलेआजम को जीनत अमान के पिता अमानुल्लाह खान, कमाल अमरोही, वजाहत मिर्जा और एहसान रिजवी ने मिलकर लिखा था। मुगले आजम की 5 अनसुनी कहानियां …।

105 बार लिखा गया था गाना : शीश महल सेट पर मधुबाला के साथ शूट किया गया गाना- प्यार किया तो डरना क्या… शकील बंदायूनी ने लिखा है। म्यूजिक डायरेक्टर नौशाद का अप्रूवल मिलने से पहले इसे 105 बार लिखा गया था। यह गाना 10 लाख में शूट किया गया था, जबकि इससे कम में एक पूरी फिल्म बन जाया करती थी।

– मिक्सिंग जैसी सुविधाएं न होने के कारण नौशाद ने गाने में गूंज लाने के लिए लता के साथ इसे स्टूडियो के वॉशरूम में रिकॉर्ड किया था।

पहले ये निभा रहे थे किरदार :मुगले आजम की पहली कास्ट में चंद्र मोहनअकबर के रोल के लिए, डीके सप्रू सलीम के रोल में और नरगिस को अनारकली के लिए कास्ट किया गया था। चंद्रमोहन की 1949 में हार्टअटैक के कारण मौत हो गई। लगभग बंद हो चुकी फिल्म दोबारा नई कास्ट के साथ शुरू हुई। जिसमें पृथ्वीराज कपूर, दिलीप कुमार, मधुबाला लीड रोल में थे।

– मधुबाला का रोल भी पहले सुरैया काे दिया जा रहा था।

बंटवारे में पाकिस्तान चला गया फाइनेंसर : आजादी से पहले 1946 में मुगले आजम की शूटिंग शुरू हो चुकी थी। आजादी के बाद हुए दंगों के चलते फिल्म के फाइनेंसर सिराज अली पाकिस्तान चले गए। के आसिफ की फिल्म बिना पैसाें के रुक गई।

– मुगले आजम का टोटल बजट 1.5 करोड़ था और यह लगभग 16 साल में बनकर तैयार हुई थी।

सेना के जवानों के साथ शूट हुआ था युद्ध :मुगले आजम में सलीम और अकबर के बीच युद्ध का सीन भारतीय सेना की 56 जयपुर रेजीमेंट के 2000 ऊंट, 400 घोड़े आैर 8000 सैनिकों के साथ शूट किया गया था।

– यह सीन भारतीय रक्षा मंत्रालय की खास परमिशन के साथ फिल्माया गया था, जो अब लगभग असंभव है।

मराठा मंदिर में हुआ था शाही प्रीमियर : डायरेक्टर के. आसिफ की मुगले आजम 1944 से शुरु होकर 1960 तक पूरी हो पाई। फिल्म के प्रीमियर में इंडस्ट्री के 1100 लोग पहुंचे थे। फिल्म की रील काे प्रीमियर के लिए हाथी पर रखकर लाया गया था। साथ ही शहनाई और बिगुल बजाते हुए शाही अंदाज में रील मराठा मंदिर तक पहुंची थी।