अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूम मचाने वाली बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने रविवार को वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीतकर इतिहास रच दिया. तेलंगाना के हैदराबाद में जन्मीं पीवी सिंधु का खेल में अंतरराष्ट्रीय कॅरियर साल 2009 से शुरू हुआ. उनके बारे में विस्तार से जानने के लिए पढ़िए पूरी खबर…. पीवी सिंधु (फाइल फोटो- फेसबुक)पीवी सिंधु (फाइल फोटो- फेसबुक)

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूम मचाने वाली बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने रविवार को वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीतकर इतिहास रच दिया. तेलंगाना के हैदराबाद में जन्मीं पीवी सिंधु का खेल में अंतरराष्ट्रीय कॅरियर साल 2009 से शुरू हुआ.

  • पीएम मोदी, अमित शाह और उपराष्ट्रपति ने पीवी सिंधु को दी जीत की बधाई
  • पीवी सिंधु के माता-पिता वॉलीबॉल खिलाड़ी रहे, लेकिन बेटी ने बैडमिंटन चुना

पुसारला वेंकटा सिंधु यानी पीवी सिंधु ने रविवार को स्विट्जरलैंड में बीडब्ल्यूएफ बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप-2019 जीतकर इतिहास रच दिया है. वो बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं. इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, खेल मंत्री किरण रिजिजू, राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट कर पीवी सिंधु को बधाई दी है.

सिंधु ने जापान की नोजुमी ओकुहारा को 21-7, 21-7 से हराया. इस जीत के साथ ही सिंधु ने ओकुहारा से साल 2017 का बदला ले लिया. दो साल पहले में वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में ओकुहारा ने सिंधु का सपना तोड़ा था. पीवी सिंधु ने ओलंपिक 2016 में रजत पदक जीता था. साल 2012 में सिंधु ने 17 साल की उम्र में वर्ल्ड बैडमिंटन रैंकिंग में शीर्ष 20 खिलाड़ियों में जगह बना ली थी.

साल 2009 में जीता पहला अंतरराष्ट्रीय पदक

तेलंगाना के हैदराबाद में 5 जुलाई 1995 को जन्मीं पीवी सिंधु का बैडमिंटन में अंतरराष्ट्रीय करियर साल 2009 से शुरू हुआ. उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर धूम मचाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना पहला पदक साल 2009 में जीता था. पीवी सिंधु के पिता पीवी रमन्ना और मां पी. विजया भी वॉलीबॉल खिलाड़ी रहे, लेकिन बेटी पीवी सिंधु ने बैडमिंटन को चुना. पीवी सिंधु के पिता पीवी रमन्ना को साल 2000 में अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया था. पीवी सिंधु ने मेंहदीपट्टनम स्थित सेंट ऐन्स कॉलेज फॉर वुमेन से पढ़ाई की.

बचपन में ही शटलर बनने का कर लिया था फैसला

जब साल 2001 में पुलेला गोपीचंद ने ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैम्पियनशिप का खिताब जीता था, उस समय सिंधु ने बड़ी होकर शटलर बनने का निश्चय कर लिया था. उन्होंने महज 8 साल की उम्र में ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था. उन्होंने महबूब अली की देखरेख में बैडमिंटन की बेसिक ट्रेनिंग सिकंदराबाद के रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ सिगनल इंजीनियरिंग ग्राउंड से शुरू की थी. इसके बाद सिंधु ने पुलेला गोपीचंद की हैदराबाद स्थित गोपीचंद एकेडमी में ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया था.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मचाई धूम, पुरस्कार भी झटके

पीवी सिंधु ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहला पदक साल 2009 में जीता था. इसके बाद साल 2013 में उन्होंने विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता था. वो साल 2014 में विश्व चैम्पियनशिप, एशियन गेम्स और राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीत चुकी हैं. उन्होंने साल 2016 में रियो डी जिनेरियो ओलंपिक और साल 2017 में विश्व चैम्पियनशिप में रजत पदक जीता था. पीवी सिंधु को साल 2013 में अर्जुन अवॉर्ड, साल 2015 में पद्मश्री पुरस्कार और साल 2016 में राजीव गांधी खेलरत्न पुरस्कार से नवाजा जा चुका है.